पटना: सार्वजनिक स्थल पर शराब पीते और बेचते पकड़े जाने पर दस साल की कैद होगी। साथ में 1-5 लाख रुपए तक का जुर्माना भी वसूला जाएगा। राज्य में 1 अप्रैल से शराबबंदी लागू होने की वजह से सरकार ने कानून को और अधिक सख्त बना दिया है। शराबबंदी के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में कोई बाहर से लाकर भी शराब नहीं पी सकेगा।
बुधवार को कैबिनेट ने नए प्रावधानों को मंजूरी दी। पुलिस किसी को शराब से जुड़े मामले में फंसाएगी तो उसपर भी कार्रवाई होगी। अब तक कार्रवाई का प्रावधान नहीं था। नई उत्पाद नीति को विधानमंडल में पेश करने को भी मंजूरी मिली।
शराब पर सौ फीसदी पाबंदी वाले गुजरात में ये हैं प्रावधान
तीन साल की सजा : पूर्ण शराब बंदी वाले गुजरात में शराब पीते पकड़ाना जमानती अपराध घोषित है। गुजरात स्टेट प्रोहिविजन एक्ट के तहत ऐसे अपराध में अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है। जबकि बिहार में ऐसे मामले में 10 साल कैद का प्रावधान हुआ है।
फांसी की सजा: जहरीली शराब कांड की स्थिति में शराब बनाने अथवा बेचने का अपराध साबित होने पर फांसी की सजा तक का प्रावधान है।
चीनी मिलों के स्प्रिट बनाने पर रोक
राज्य में चीनी मिलों के स्प्रिट बनाने पर रोक लगा दी गई है। मंगलवार को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब चीनी मिलों में एथेनॉल का उत्पादन होगा जिसे पेट्रोल में मिलाया जाएगा।
एक अफसर व तीन डॉक्टर बर्खास्त
राज्य सरकार ने ग्रामीण विकास विभाग में तैनात बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मनोज कुमार को बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा तीन चिकित्सक पर भी कार्रवाई की गई है। डॉ. ओमप्रकाश, डॉ. जवाहर लाल प्रसाद और डॉ. कलीमुद्दीन को बर्खास्त करने का फैसला लिया गया है।
शिक्षकों के वेतन को 200करोड़
- जिला परिषद और नगर निकायों के 20 हजार माध्यमिक शिक्षकों को वेतन के लिए 200 करोड़ रुपए मंजूर।
- कॉलेज शिक्षकों की बहाली और प्रोन्नति मामलों पर गठित जस्टिस एनएन झा कमेटी को मिला अवधि विस्तार।
- आयुष चिकित्सकों को प्रोन्नति।
- 140 नगर निकायों के लिए 434 करोड़ रुपए की स्वीकृति।
- सामाजिक सहायता कार्यक्रम के लिए 70 करोड़ रुपए मंजूर।
- मुख्यमंत्री सामाजिक सुरक्षा योजना के लिए 400 करोड़ रुपए।
Source: Dainik Bhaskar

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