पटना: ‘चैरिटी बिगीन्स एट होम’। हम शराबबंदी का कानून बना रहे हैं, तो यहीं (विधानसभा) से संकल्प भी लें कि न पीएंगे और न ही दूसरों को पीने देंगे।’ बुधवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब इन पंक्तियों के जरिए भाजपा विधायक विजय कुमार सिन्हा के शराबबंदी के प्रस्ताव को बाकायदा संकल्प का रूप दिया, तो सदन में मौजूद स्पीकर विजय कुमार चौधरी समेत सत्ता पक्ष व विपक्ष के सभी सदस्यों ने खड़े होकर इससे सहमति जताई और सर्वसम्मति से शराबबंदी के संशोधित कानून (उत्पाद संशोधन विधेयक 2016) को पारित कर दिया।
सबकी राय से हुआ कानून पारित
विधानसभा में स्पीकर और विधानपरिषद में सभापति अवधेश नारायण सिंह ने मुख्यमंत्री की इन्हीं बातों को आगे बढ़ाते हुए सदस्यों को खुद शराब नहीं पीने और दूसरों को नहीं पीने के लिए जागरूक करने का संकल्प दिलाया, शपथ दिलाई। परिषद में भी सबकी इकट्ठी राय से यह कानून पारित हुआ।
भोजनावकाश के बाद विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही उत्पाद मंत्री अब्दुल जलील मस्तान ने विधेयक पेश किया। भाजपा के विजय सिन्हा और संजय सरावगी ने 1915 के कानून में संशोधन के लिए लाए गए इस विधेयक के सिद्धांत पर विमर्श की जरूरत बताई। भाजपा के अरुण सिन्हा ने जनमत जानने का प्रस्ताव रखा। दोनों प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हुए।
स्पीकर ने कहा-विधेयक के खंड संख्या 2-7 के बीच कोई संशोधन नहीं है। लिहाजा खंड 1 विधेयक का अंग बने। और इसी के साथ पक्ष-विपक्ष की दीवार ढह गई। विधेयक को पास करने के लिए बस ‘हां’ की आवाज आई।
विपक्ष के नेता डॉ.प्रेम कुमार और ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के बीच थोड़ी देर टोका-टोकी हुई। अंतत: स्पीकर ने ध्वनिमत से वोटिंग कराई। सिर्फ ‘हां’ पक्ष में आवाज आई। उन्होंने कहा-’हां’ के पक्ष में बहुमत है, प्रस्ताव सर्वसम्मति से स्वीकृत हुआ। विधान परिषद का भी लगभग यही नजारा रहा।
नीतीश बोले- ‘चैरिटी बिगीन्स एट होम’... और हाउस एकमत
राज्य में 1.61 लाख लोग शराब के आदी
-राज्य में 1,61,770 लोग शराब के आदी हैं। इनमें 1500 महिलाएं हैं।
-शराबबंदी के ऐलान के बाद दिसंबर से अब तक 58,531.67 एलपीएल अवैध देसी/ चुलाई शराब पकड़ी/नष्ट की गई है।
-राज्य में 2015-16 में 694.87 लाख एलपीएल देसी शराब की खपत। (1 एलपीएल= 5.62 लीटर)
-देसी शराब से लगभग 2300 करोड़ रुपए का सालाना राजस्व प्राप्ति।
-शराबबंदी के ऐलान के बाद दिसंबर से अब तक 58,531.67 एलपीएल अवैध देसी/ चुलाई शराब पकड़ी/नष्ट की गई है।
-राज्य में 2015-16 में 694.87 लाख एलपीएल देसी शराब की खपत। (1 एलपीएल= 5.62 लीटर)
-देसी शराब से लगभग 2300 करोड़ रुपए का सालाना राजस्व प्राप्ति।
तब पुलिस वाले होंगे बर्खास्त
परिषद में मुख्यमंत्री ने कहा-पुलिस वाले कानून तोड़कर शराब पिएंगे तो बर्खास्त होंगे। शराबबंदी के लिए पुलिस जिम्मेदार है। थाने को सर्टिफिकेट देना है कि उसके क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार नहीं है। शराब की जीपीएस सिस्टम से मॉनीटरिंग होगी। बेवरेज कॉरपोरेशन की विदेशी शराब की दुकानों पर भी सीसीटीवी लगा रहेगा। शराब की वैन पर डिजिटल लॉक रहेगा।
पूर्ण शराबबंदी की तारीख बताएं : मोदी
स्प्रिट के खात्मे की स्पिरिट देखें : नीतीश
परिषद में सुशील मोदी ने नीतीश से पूर्ण शराबबंदी की तारीख पूछी। नीतीश ने कहा-स्प्रिट को खत्म करने का स्पिरिट है। हम पूर्ण शराबबंदी को संकल्पित हैं। इसकी तारीख मत पूछिए मोदी जी। पूर्ण शराबबंदी के लिए आपकी ओर से जो भी सुझाव आएंगे, उसे हम गंभीरता से लेंगे। हम सभी को एकजुट रहना है। शराबबंदी को लेकर लोगों में उत्साह है। शराबबंदी पर कुछ विपक्षी सदस्यों के संशय पर कहा-’बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी? सरकार, शराबबंदी के लिए संकल्पित है।’
इस फैसले में साहस भी है और सख्ती का एहसास भी
इतिहास कायम करने वाले फैसले की आहट भी ऐतहासिक होती है। बिहार सरकार ने प्रदेश में शराबबंदी का जो ऐतिहासिक फैसला लिया है, वह शुक्रवार से लागू होने जा रहा है। इससे पहले, बुधवार को ही बिहार विधानमंडल ने ऐतिहासिक काम किया है। सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया है कि शराब न पीएंगे और न किसी को पीने देंगे। सालों बाद एक ऐसा मसला आया जिस पर किसी ने भी आपत्ति नहीं की। बहुत बड़े सामाजिक बदलाव की उम्मीद को इससे बल मिला है। माना जा सकता है कि माननीयों का यह कदम बिहार को शराबमुक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं की मांग पर शराबबंदी का फैसला लिया है। नि:संदेह सच यह भी है कि इस फैसले से सिर्फ महिलाओं का ही नहीं, पुरुषों का भी भला होने वाला है। शेष|पेज 11
इस फैसले में...
यूं कहें, बिहार के सामाजिक-आर्थिक बदलाव का वायस बनेगा यह फैसला। घरेलू हिंसा से मुक्ति, लघु बचत को प्रोत्साहन जैसे फायदे सुनने में भले ही छोटे लगते हों, मगर हमारे समाज को दूरगामी लाभ दिलाएंगे। बिहार के भले के लिए लिया जा रहा यह फैसला जमीन पर पूरी तरह से लागू हो और जल्द ही पूर्ण शराबबंदी का भी फैसला सरकार ले, ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए। इस फैसले को सख्ती से लागू करना भी एक चुनौती है। सरकार ने पूरी तैयारी के साथ शराबबंदी के साइड इफेक्ट को ध्यान में रखते हुए प्लान बनाया है। यह फैसला शराब के आदी लोगों को कड़वा लग सकता है लेकिन इसके असर में नशा नहीं उम्मीद की नई किरणें हैं। बिहार में शराबबंदी जैसा सख्त कदम साहस भरा है। शायद विपक्ष के पास भी इसमें कमियां निकालने जैसा कुछ नहीं है।
Source: Bhaskar

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