पटना: हाईकोर्ट में शराबबंदी को लेकर मंगलवार को लंबी सुनवाई हुई। लेकिन कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया। आदेश के मुद्दे पर बुधवार को प्रधान अपर महाधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद ही कोर्ट कोई निर्णय देगा। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति इकबाल अहमद अंसारी का न्याय कक्ष वकीलों और मुवक्किलों से खचाखच भरा था।
भीड़ देखकर न्यायमूर्ति अंसारी ने मुस्कुरा कर चुटकी ली और कहा कि सभी पीने वालों की भीड़ तो नहीं। इसपर कोर्ट में ठहाके भी लगे। सुनवाई समाप्त होने के बाद कोर्ट रूम के बाहर खड़े वकीलों में जानने की बेचैनी थी कि क्या हुआ? क्या शराब पीने की इजाजत मिली? नकारात्मक जवाब मिलने पर सबका कहना था कि पीने पर पाबंदी क्यों?
2 तक लाइसेंस जारी और 5 को पूर्ण शराबबंदी, सजा भी काफी कठोर
दूसरी याचिका पर बहस करते हुए वरीय अधिवक्ता यदुवंश गिरी ने कहा कि वर्ष 2016-17 के लिए लाइसेंस दिया गया जिसके आधार पर बार और रेस्टोंरेंट में उपयोग के लिए विदेशी शराब की खरीद की गई। लाइसेंस राज्य सरकार ने उत्पाद नीति के तहत ही जारी किया था। 2 अप्रैल को भी लाइसेंस निर्गत किया गया और 5 अप्रैल को अचानक कैबिनेट ने निर्णय लेकर पूरे राज्य में विदेशी शराब पर पाबंदी लगा दी जो कानूनी रूप से सही नहीं है। सजा का भी प्रावधान काफी कठोर है। अन्य राज्यों में पकड़े जाने पर जहां 6 महीने की सजा है तो यहां 10 साल है जो जरूरत से ज्यादा है। उन्होंने राज्य सरकार की शराब नीति को पूरी तरह गलत बताया।
जिनका पैसा जमा है उसे वापस कर दिया जाएगा
प्रधान अपर महाधिवक्ता ललित किशोर ने राज्य सरकार के नीतिगत निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि उत्पाद अधिनियम में किए गए संशोधन के आधार पर पूरे राज्य में विदेशी शराब पर रोक लगाई गई है। उन्होंने कहा कि जिनका पैसा जमा है उसे वापस कर दिया जाएगा। विदेशी शराब का जो स्टॉक बचा हुआ है उसके लिए भी उचित समय दिया जाएगा। लेकिन किसी भी हालत में शराब की बिक्री करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उस पर याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि जबतक सरकार का जवाब नहीं आता, तबतक के लिए अंतरिम आदेश दिया जाय ताकि किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो। तब प्रधान अपर महाधिवक्ता ने कहा कि उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव अभी उपलब्ध नहीं हैं और दिन में 12 बजे मुझे याचिका की प्रति दी गई है इसलिए वे बुधवार को सरकार का पक्ष पेश करेंगे। इस पर कोर्ट ने बुधवार के लिए सुनवाई टाल दी।
फैसले का नहीं, लागू करने के तरीके का विरोध कर रहे हैं हुजूर
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अंसारी तथा न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की खंडपीठ ने कनफेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज तथा अन्य और बार एंड रेस्टोरेंट ओनर्स एसोसिएशन की ओर से मनोज कुमार तथा अन्य की ओर से दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई की। पहली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता विकास सिंह ने बहस की। उन्होंने विदेशी शराब कंपनियों का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार ने एक्साइज पाॅलिसी के तहत लाइसेंस निर्गत किया। लेकिन नीतियों का उल्लंघन कर अचानक शराब के भंडारण व उपभोग पर रोक लगा दी। उन्होंने कहा कि वे शराबबंदी के निर्णय का विरोध नहीं कर रहे है। परंतु जो तरीका अपनाया गया, उसका विरोध कर रहे हैं। दलील थी कि विदेशी शराब बनाने का अिधकार राज्य सरकार ने ही दिया था। अगर सरकार हमें पूरी राशि वापस कर देती है तो हम अपना कारोबार बंद कर देंगे।
Source: Bhaskar

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