देशभर के 526 ऑटोनोमस शैक्षणिक संस्थानों में बिहार में सिर्फ एक, कई हैं दावेदार

Just one university in 526 autonomous educational institutions

Autonomous University in Bihar

पटना: राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की राष्ट्रीय पटल पर स्थिति, दूसरे राज्यों के संस्थानों के मुकाबले कमजोर है। ये नैक की ग्रेडिंग में तो पिछड़े हैं ही, हाल में जारी नेशनल रैंकिंग में भी टॉप 100 की सूची में बिहार के संस्थान गायब रहे। ऑटोनोमस संस्थानों की रेस भी बिहार के कॉलेजों के लिए अबूझ पहेली की तरह रही है क्योंकि अबतक यहां से सिर्फ एक कॉलेज को यह दर्जा प्राप्त है। जबकि देशभर में 526 ऑटोनोमस शैक्षणिक संस्थान हैं।
हालांकि, बदली परिस्थितियों में बिहार के कई कॉलेज ऑटोनोमस स्टेटस के दावेदार हो गए हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने ऑटोनोमस स्टेटस प्राप्त करने के लिए नई गाइडलाइन्स तैयार की है। इनके मुताबिक अब नैक से ग्रेडिंग प्राप्त संस्थानों को ही ऑटोनोमस का दर्जा दिया जाएगा।
टॉप 5 राज्य
- तमिलनाडु - 164
- आंध्रप्रदेश - 116
- कर्नाटक - 57
- ओडिशा - 39
- मध्य प्रदेश - 37
ब्रज मोहन ठाकुर लॉ कॉलेज पूर्णिया को मिल चुका है दर्जा

राज्य में लगभग 250 कॉलेजों में से सिर्फ 1 कॉलेज को ऑटोनोमस संस्थान का दर्जा मिला है। बीएन मंडल विश्वविद्यालय के ब्रज मोहन ठाकुर लॉ कॉलेज, पूर्णिया को ऑटोनोमस का दर्जा मिला हुआ है। यूजीसी ने यह दर्जा कॉलेज को 2009-10 में दिया था।
बेहतर प्रदर्शन का मिलेगा उपहार

यूजीसी ने ऑटोनोमस स्टेटस देने में नैक की महत्ता को और बढ़ा दिया है। अब आयोग ने वैसे कॉलेजों को बिना स्पॉट वेरिफिकेशन के ऑटोनोमस स्टेटस देने का फैसला किया है, जो लगातार बेस्ट ग्रेडिंग पाने में सफल रहे हैं। अगर तीसरे चरण की नैक ग्रेडिंग में इन संस्थानों को बेस्ट ग्रेड मिलता है तो ये कॉलेज ऑटोनोमस दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए एफिलिएटिंग यूनिवर्सिटी को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी करना होगा।
नियमों में बदलाव के बाद संभावना

नए नियमों के आने के बाद राज्य के तीन कॉलेज सीधे तौर पर ऑटोनोमस स्टेटस के दावेदार हो गए हैं। इसमें पटना विश्वविद्यालय का पटना वीमेंस कॉलेज, मगध विश्वविद्यालय का एएन कॉलेज और गया कॉलेज शामिल हैं। इन तीनों कॉलेजों के पास शुरुआत से लेकर अबतक नैक की ग्रेड प्राप्त है।
ये हैं फायदे :ऑटोनोमस संस्थान होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन संस्थानों में सत्र के लेट होने की आशंका नहीं रहती। एएन कॉलेज और गया कॉलेज, मगध विवि का हिस्सा हैं। तमाम अच्छाइयों के बावजूद इन कॉलेजों का सत्र विवि प्रशासन की लापरवाही के कारण लेट हो जाता है। ऑटोनोमस संस्थान का दर्जा मिला तो यह समस्या दूर हो सकती है। इसके अलावा ऑटोनोमस संस्थानों में ग्रांट का बेहतर यूटीलाइजेशन हो सकता है। साथ ही एकेडमिक स्वायत्तता भी अधिक होगी और इनोवेटिव प्रयास संभव होंगे।
Source: Bhaskar
Labels:

Post a Comment

Incredible Bihar

(c) All right reserved by Incredible Bihar

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget