पटना: अपनी-अपनी मजबूरी को अपने-अपने फायदे में बदलने के लिए जदयू व राजद में नए समझौते की कवायद जारी है। मसला, राज्यसभा और विधान परिषद की सीटों का है। 7 जुलाई को राज्यसभा से जदयू के 5 सदस्य रिटायर्ड होने वाले हैं। ताजा सियासी गणित के तहत जदयू को अब दो ही सीटें मिलेंगी। दो राजद के खाते में जाना तय है। एक भाजपा को मिलेगी। इसी तरह 21 जुलाई तक विधान परिषद की 7 सीटें भरी जानी हैं। दो-दो जदयू और राजद और एक कांग्रेस को मिल सकेंगी।
सियासी गलियारे में चर्चा है कि जदयू को राज्यसभा की एक सीट देकर राजद विधान परिषद की तीन सीटें ले सकता है। यह महागठबंधन की भविष्य की राजनीति है। राज्यसभा की दो सीटों में से एक पर जदयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव का जाना तय है। बाकी बची एक सीट। दावेदार हैं रालोद के अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह, केसी त्यागी, आरसीपी और संभवत: प्रशांत किशोर भी। राजद में भी यही हाल है। दो में से एक सीट पर राबड़ी देवी का जाना तय माना जा रहा है। एक सीट अल्पसंख्यक को दी जानी है। यह सीट राजद अगर जदयू को दे दे तो वह शरद के अलावा दो और वरिष्ठतम को दिल्ली दिखेगी। राजद अपने नेताओं को विधान परिषद में बिठाकर इसकी भरपाई करेगा। लेकिन, इस पूरे प्रकरण में मीसा भारती की हां-ना का पेंच फंसा हुआ है।
दरअसल, राज्यसभा की खाली होने वाली 5 सीटें फिलहाल जदयू के पास हैं। शरद यादव, केसी त्यागी, रामचन्द्र प्रसाद सिंह, पवन वर्मा और गुलाम रसूल बलियावी का टेन्योर पूरा हो रहा है। अध्यक्ष पद छोड़ने वाले शरद का फिर से जाना तय है। पवन और बलियावी को रिपीट करने का कारण दिखता नहीं। जदयू चाहेगा कि दो नेताओं को फिर से राज्यसभा में बिठा दिया जाए। उधर, परिषद में जदयू के विजय वर्मा, मंजर आलम, उदयकांत एवं रुदल राय, भाजपा से किरण घई एवं हरेन्द्र प्रताप रिटायर्ड हो रहे हैं। राजद के भोला यादव के विधायक बन जाने से एक सीट खाली है। सात सीटों में से दो-दो जदयू-राजद को और एक कांग्रेस को मिलना है। राजद से डॉ. रामचंद्र पूर्वे का जाना तय माना जा रहा है। बाकी बचे एक नाम पर विचार चल रहा है। राजद उसी शर्त पर जदयू को राज्यसभा की एक सीट देगा, जब जदयू विधान परिषद की अपनी सीट दे।
मीसा क्या चाहेंगी?
राज्यसभा में जाना या फिर परिषद से प्रदेश में पार्टी को संभालना। उनकी मर्जी होगी। राबड़ी देवी के साथ एजाज अली, कमर आलम या तनवीर हसन में से एक राज्यसभा जा सकता है। पर, मीसा दिल्ली चाहेंगी तो एक अल्पसंख्यक को परिषद भेजना पड़ेगा। मीसा परिषद जाना चाहें तो तो राजद एक सीट जदयू को भी दे सकता है।
Source: Bhaskar

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