एड्स पीड़ित दिवंगत दंपती की पुत्री के इलाज के लिए बढ़े हाथ

NRI came forward to help girl of Bihar. It is really a good step for a good society.

Charity for poor girl in Bihar
आरा: क्रोनिक डायरिया से बीमार अनाथ बच्ची स्नेहा के इलाज में मदद के लिए लोग हाथ बढ़ाने लगे हैं। रविवार को ‘दैनिक भास्कर’ में ‘’सर! हम अनाथ हैं, इलाज करा दें’’ शीर्षक से स्नेहा की खबर प्रकाशित हुई थी। इसके बाद उसकी मदद के लिए लोगों का कारवां बढ़ने लगा है। सबसे पहले अमेरिका में रहनेवाले एनआरआई सिद्धू सिंह ने स्नेहा की मदद के लिए आगे आए।
गौरतलब है कि एनआरआई सिद्धू सिंह वे स्नेहा की तलाश में आरा में एक घंटे तक पैदल घूमे। बाद में स्नेहा तक पहुंचने के लिए दैनिक भास्कर में छपी खबर के आधार पर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅक्टर सतीश सिन्हा व बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष डा. सुनीता सिंह से मिले। दोनों से स्नेहा के इलाज के संदर्भ में मुकम्मल जानकारी ली। उसके प्रारंभिक इलाज के लिए सदर अस्पताल के उपाधीक्षक व आदर्श सौम्य संस्था घनश्याम कुमार की मौजूदगी में 20 हजार रुपए बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष को दिए। साथ ही इलाज में खर्च के लिए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
एनआरआई सिद्धेशवर सिंह उर्फ सिद्धू सिंह अमेरिका के टेक्सास प्रांत के हॉस्टन टाउन में रहते हैं। वे मूलतः कोईलवर प्रखंड के चांदी के भदवर गांव के निवासी हैं। स्नेहा की मदद के संदर्भ में सिद्धु सिंह ने गुप्त मदद की बात कहकर पहले तो अपना परिचय देने से इंकार किया। काफी कुरेदने पर परिचय व फोटो शूट कराने को राजी हुए।
हेडिंग से हो गया द्रवित

सिद्धू सिंह ने बताया कि रविवार सुबह दैनिक भास्कर पढ़ रहा था। मेरी नजर एक खबर की हेडिंग पर गई। हेडिंग थी -सर! हम अनाथ हैं, इलाज करा दें। पूरी खबर पढ़ने के बाद मैं द्रवित हो गया। उसी समय मैंने ठान लिया कि स्नेहा की मदद करूंगा। घर में बिना किसी को बताए सुबह दस बजे भतीजे के साथ सदर अस्पताल के लिए निकल गया। अस्पताल आने के बाद भतीजा को लौटा दिया। खबर की कटिंग लेकर पैदल बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष का पता ढूंढने लगा।
देश सेवा हमारा फर्ज: सिद्धू

एनआरआई सिद्धू सिंह ने कहा कि खबर पढ़ने के बाद लगा कि स्नेहा की मदद करनी चाहिए। यहां आने के बाद दैनिक भास्कर पढ़ता हूं। इस अखबार की सकारात्मक खबर से स्नेहा को नया जीवन देने का मेरा यह छोटा प्रयास है। मेरा जन्म भारत की मिट्टी में हुआ है। इस देश ने मुझे बहुत कुछ दिया है। देश की सेवा करना मेरा फर्ज बनता है। मेरे पुत्र व पुत्री अमेरिका में हैं। मेरा गांव आना-जाना होता रहता है। मैने मां-पिता से सीखा है, अपनी मिट्टी से प्यार करना।
कौन है स्नेहा ?
स्नेहा बड़हरा प्रखंड के कृष्णगढ़ के नरगदा गांव की रहनेवाली है। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है। वे एड्स से पीड़ित थे। स्नेहा को क्रोनिक डायरिया बीमारी के कारण एक साल से खाना हजम नहीं हो रहा है। इलाज खर्च वहन करने में मजदूर चाचा दिनेश्वर प्रसाद असमर्थ है। इस लिहाज से उसकी मदद अतिआवश्यक है।
सोशल नेटवर्क पर बना ‘हेल्प फॉर स्नेहा’ ग्रुप
सोशल मीडिया पर ‘हेल्प फॉर स्नेहा’ ग्रुप बनाकर मदद की मुहिम चलने लगी है। स्नेहा की मदद के लिए रविवार शाम तक करीब 50 लोगों ने मदद का वादा किया है।
Source: Bhaskar
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