पटना: सरकारी अस्पतालों में पारा मेडिकल कर्मियों की कमी दूर होगी। कंपाउंडर, ड्रेसर, इसीजी-ईईजी-अल्ट्रासाउंड टेक्नीशियन, डायलिसिस-पैथोलॉजी सेवा समेत डाॅक्टरी सेवा में काम आने वाले तकनीकी कर्मियों की कमी दूर करने के लिए पारा मेडिकल संस्थान खोले जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पतालों में इन संस्थानों को चलाने की योजना बनाई है।
पांच जिले, जहां पुराने मेडिकल कॉलेज हैं, उनको छोड़ 33 जिलों में ये संस्थान खुलेंगे। पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और गया में ये संस्थान नहीं खुलेंगे। इन जिलों के मेडिकल कॉलेजों में पारा मेडिकल की पढ़ाई होती है। इन संस्थानों को खोलने के लिए 5 वर्ष में 150 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस साल 24 करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य है। चालू वित्तीय वर्ष में किन जिलों में ये संस्थान खोले जाएं, उसके चयन की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। दरअसल स्वास्थ्य क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए सरकार ने दूसरे चरण की सुधार कार्यक्रम के तहत हर जिले के दो एपीएचसी में भी रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी सेवा देने का निर्णय किया है।
वहीं सभी जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन जांच और डायलेसिस सेवा बहाल करने की योजना बनाई है। हृदय रोगियों को जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधा बहाल करने के लिए सभी जिला अस्पतालों में इकोकॉर्डियोग्राफी करने का निर्णय लिया गया है। इन अस्पतालों में 24 घंटे आईसीयू चलाने की प्रक्रिया भी चल रही है।
अभी चल रहे 8 सरकारी पारा संस्थान
अभी सरकारी स्तर पर 8 पारा मेडिकल संस्थान ही चल रहे हैं। पीएमसीएच पटना, एनएमसीएच पटना, डीएमसीएच दरभंगा, एएनएमएमसीएच गया, जेएलएनएमसीएच भागलपुर, एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर, पटना डेंटल कॉलेज और पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूट पटना में पारा मेडिकल की पढ़ाई होती है। इनमें डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी कोर्स में 155 सीट, ओटी असिस्टेंट में 70, ऑप्थेलमिक असिस्टेंट में 100, एक्सरे टेक्निशयन में 70 और डीएसआई कोर्स में 100 सीटों पर नामांकन होता है। इनके अलावा 12 सर्जेंसियों (सिविल सर्जन के अधीन) में ड्रेसर कोर्स में 60 सीटों पर नामांकन होता है।
इन संस्थानों से जितने पारा मेडिकल कर्मी तैयार होते हैं, उनकी संख्या राज्य के सरकारी अस्पतालों की तुलना में कम है। यह देखते हुए जिला अस्पतालों की आधारभूत संरचना के हिसाब से 33 जिला अस्पतालों में सीटों की संख्या तय की जा रही है।
Source: Bhaskar

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