पटना: जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सवा घंटे के भाषण में जमकर कोसा। खूब भड़ास निकाली। तीखे व्यंग्य किए। भाजपा और संघ के खिलाफ सभी राजनीतिक दलों वामपंथियों, समाजवादियों और अन्य धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के लोगों को एकजुट होने की अपील की। जय भीम के साथ लाल सलाम का नारा दिया।
अ से पढ़ेंगे आम म से मोदी नहीं
कन्हैया-कन्हैया के नारे पर अपने समर्थकों को चेताया- ज्यादा कन्हैया-कन्हैया मत बोलिए, मोदी-मोदी जैसा लगने लगेगा। रविवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन की आजादी संगोष्ठी में कन्हैया ने पूरे देश में समान शिक्षा लागू कराने के लिए आंदोलन की बात कही। कहा- अ से आम और आजादी पढ़ेंगे, लेकिन म से मोदी नहीं पढ़ेंगे।
मोदी जी कैसे आपके खिलाफ न बोलूं
कन्हैया ने मोदी पर कटाक्ष किया- मोदी जी आपके खिलाफ तो बोलना ही होगा। आपने देश चलाने की जिम्मेदारी ली है। लोगों को महंगाई, भूख, गरीबी और अशिक्षा से मुक्ति दिलाने की जिम्मेदारी ली है। लेकिन न लोगों को रोजगार मिले और न महंगाई घटी। मैं रोज एकाउंट चेक करता हूं, लेकिन अभी तक 15 लाख रुपए अकाउंट में नहीं आए। आपने हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन दो साल में दो लाख लोगों को भी रोजगार नहीं दिलाया। स्कॉलरशिप छीन ली। बताइए मोदी जी कैसे आपके खिलाफ न बोलूं?
उन्होंने कहा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से टिकट के लिए मिलने नहीं गया था, उनसे राज्य में समान शिक्षा कानून लागू करने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री जी ने कहा-केंद्र को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा है, लेकिन मंजूरी नहीं मिली है। अब बताइए मोदी जी कैसे आपके खिलाफ न बोलूं। मंत्री और अधिकारी की सरकारी लाभ चाहिए, लेकिन ये बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाएंगे। बोरा वाला (सरकारी स्कूल) और सीसा वाला (प्राइवेट स्कूल) के बच्चों को एकसाथ प्रतियोगिता परीक्षा में कैसे बैठा सकते हैं। सरकार को पैसे नहीं है तो सभी बच्चों को बोरा वाला स्कूल में ही लाइए। मंत्री और अधिकारी से लेकर गरीब का बच्चा भी एक स्कूल में पढ़े।
उमर खालिद के भाषण पर क्या बोलेंगे कन्हैया?
एक बुजुर्ग ने पूछा- उमर खालिद के भाषण पर क्या बोलेंगे कन्हैया? इस पर कन्हैया ने कहा-उमर खालिद से वैचारिक मतभेद हैं। इसके बावजूद बोलने की आजादी कैसे छीनी जा सकती है। बाद में एक और युवक ने भी कन्हैया से तीखे सवाल दाग दिए।
Source: Bhaskar

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