पटना: अगले महीने से राज्य के दफ्तरों का माहौल बदला-बदला दिखेगा। डेढ़ साल से राज्य में विभागीय प्रोन्नति समिति की बैठक से रोक हटने के बाद करीब 10 हजार कर्मचारियों और पदाधिकारियों के प्रोन्नति के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा समाप्त हो गई है। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागीय प्रोन्नति समिति के लिए अपने प्रतिनिधियों को मनोनीत कर दिया है।
विभागीय स्तर पर प्रोन्नति पाने वाले कर्मचारियों और पदाधिकारियों की सूची तैयार कर ली गई है। सूत्रों के अनुसार जल्द ही डीपीसी की बैठक कर इस सूची को मंजूरी दी जाएगी। हालांकि, कई विभागों से अभी तक सूची नहीं आई है। विभाग ने सभी विभागों को जल्द से जल्द सूची भेजने का निर्देश दिया है।
डीपीसी पर 12 अगस्त, 2014 से लगी थी रोक :अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कर्मियों की प्रोन्नति में आरक्षण का मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण राज्य सरकार ने 12 अगस्त, 2014 से विभागीय प्रोन्नति समिति की बैठकों पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सरकार की अपील सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन लंबित रहते उच्च न्यायालय के 15 फरवरी, 2016 के आदेश के आलोक में राज्य सरकार ने प्रोन्नति प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। निर्णय के तहत अगले आदेश तक संवर्गीय प्रोन्नति के पद पर वरीयता के आधार पर दी जाएगी। नए आदेश के तहत अनुसूचित जाति एवं जनजाति के पदाधिकारियों-कर्मचारियों को आरक्षण एवं परिणामी वरीयता का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि एससी-एसटी के पदाधिकारियों-कर्मियों के वर्तमान धारित पद पर यथास्थिति कायम रहेगी।
कुछ प्रमुख विभाग जिसमें होना है प्रमोशन
ग्रामीण विकास विभाग | 1600 |
| राजस्व एवं भूमि सुधार | 788 |
| कारा | 600 |
| जल संसाधन | 450 |
| गृह | 250 |
| पथ निर्माण | 200 |
| पशुपालन | 250 |
| निबंधन एवं उत्पाद | 500 |
| एससी-एसटी कल्याण | 100 |
| वाणिज्य कर | 100 |
| सामान्य प्रशासन | 1500 |
| विशेष सचिव | नौ |
| अपर सचिव | 34 |
| संयुक्त सचिव | 60 |
| अपर समाहर्ता |
60
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