तेजी से बढ़ रही स्कूल जानेवाले बच्चों की तादाद, सिर्फ 1.72% रह गए बाहर

Caritas India survey on Bihar school. The results was socking and surprising.

Bihar School Students

नई दिल्ली/पटना: बिहार में स्कूल जाने वाले बच्चों की तादाद बढ़ रही है। अब सिर्फ 1.72 फीसदी बच्चे स्कूल से बाहर हैं। शिक्षा का अधिकार के दायरे में आने वाले इन बच्चों की उम्र छह से 14 वर्ष के बीच है। हालांकि, स्कूलों की हालत में और सुधार की जरूरत है। गरीबों एवं वंचितों के बीच काम करने वाली संस्था कैरिटास इंडिया के ताजा सर्वेक्षण में उपलब्धियों के अलावा खामियों की भी चर्चा की गई है। रिपोर्ट नई दिल्ली में जारी....
स्कूल जाने वाले बच्चों की तादाद में इजाफा इस लिहाज से अच्छा है कि 2005 में इस आयु वर्ग के 12.5 फीसदी बच्चे स्कूल से बाहर थे। अच्छी बात यह भी है कि इन वर्षों में शिक्षक-छात्र अनुपात में भी सुधार हुआ। फिर भी इसमें बहुत अधिक सुधार की जरूरत है। बीते 10 वर्षों में 21067 नए प्राइमरी स्कूल खुले। 19581 प्राइमरी स्कूलों को मीडिल स्कूल में अपग्रेड किया गया।
ये खामियां नजर आईं
- सिर्फ 12.5 फीसदी स्कूल लाइब्रेरी में जेनरल नालेज की किताबें हैं। अखबार और पत्रिकाओं का हाल बुरा है। 6.25 फीसदी लाइब्रेरी में ही ये उपलब्ध हैं।
- सफाई पर जोर के बावजूद 78.5 फीसदी स्कूलों में इस काम के लिए किसी की नियुक्ति नहीं की गई है। 50 फीसदी स्कूलों में स्थायी प्रिंसिपल नहीं हैं।
- शिक्षकों की बहाली के बावजूद छात्र शिक्षक अनुपात का पालन नहीं हो रहा है। यह अनुपात 35:1 का है। लेकिन, सर्वेक्षण में शामिल स्कूलों का छात्र शिक्षक अनुपात 66:1 है।
2005 में लड़कियों के लिए थे सिर्फ 6334 शौचालय
रिपोर्ट के मुताबिक पोशाक, साइकिल, मुफ्त पुस्तक, शैक्षणिक भ्रमण योजना और छात्रवृत्ति की नई योजनाओं ने भी बच्चों को स्कूल की तरफ आकर्षित किया। 2005 से तुलना करें तो शिक्षकों की तादाद में सौ फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ। स्कूल में शौचालय एवं पेयजल की व्यवस्था में भी सुधार हुआ। 2005 में बालिकाओं के लिए सिर्फ 6334 शौचालय थे। जनवरी में सर्वेक्षण के समय तक इनकी संख्या 53730 तक पहुंच गई थी। फिर भी सभी स्कूलों में यह उपलब्ध नहीं है।
कैरिटास इंडिया के जनसंपर्क अधिकारी अमृत संगमा के मुताबिक कुल 32 स्कूलों में सर्वेक्षण किया गया। इनमें 19 प्राइमरी, पांच अपर प्राइमरी और आठ अन्य सरकारी स्कूल थे। सर्वे में 65 फीसद ग्रामीण स्कूलों को शामिल किया गया। हालांकि, सर्वे के नतीजे कमी की ओर भी इशारा करते हैं। मसलन, आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सरकारी स्कूल कम हैं। अधिक स्कूल मिश्रित आबादी के बीच हैं। पुराने स्कूल भवनों की सेहत भी ठीक नहीं है। सर्वेक्षण में शामिल 46.87 फीसदी स्कूल बगैर बाउंड्री वाल के थे। कई स्कूल ऐसे भी पाए गए, जहां हर वर्ग के लिए अलग-अलग कमरा नहीं है। जरूरी फर्नीचर का भी अभाव पाया गया। सभी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है।
Source: Bhaskar
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