पटना: हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के सरकारी सेवकों को प्रोन्नति में आरक्षण फिलहाल नहीं देने का फैसला किया है। साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि जिन सरकारी सेवकों को प्रोन्नति में आरक्षण मिल चुका है, उनको डिमोट किया जाएगा क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
नए आदेश के बाद 12 अगस्त 2014 से विभागीय प्रोन्नति समिति की बैठक पर लगी रोक हट जाएगी और राज्य सरकार के कर्मचारियों और पदाधिकारियों की प्रोन्नति का रास्ता साफ हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार के कर्मचारी और पदाधिकारी पिछले डेढ़ साल से डीपीसी पर रोक को हटाने की मांग कर रहे थे। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के प्रधान सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी, विभागाध्यक्षों के अलावा बीपीएससी, कर्मचारी चयन आयोग और केन्द्रीय चयन पर्षद के सचिवों को प्रोन्नति की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।
हालांकि जिन पदाधिकारियों को पूर्व में परिणामी वरीयता के आधार पर प्रोन्नति मिल चुकी है, उन्हें डिमोट नहीं किया जाएगा। विभाग ने 12 अगस्त 2014 को जारी आदेश को वापस ले लिया है। प्रोन्नति में अनुसूचित जाति और जनजाति को परिणामी वरीयता का लाभ नहीं मिलेगा। इसलिए रोस्टर क्लियरेंस की आवश्यकता नहीं होगी। प्रोन्नति मूल कोटि की वरीयता के आधार पर दी जाएगी।
Source: Bhaskar

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