21 साल पुराने मारपीट मामले में पूर्व मंत्री रमई राम को एक साल सजा, फिर मुक्त

Former minister Ramai Ram sentenced to a year in assault case

Ramai Ram

मुजफ्फरपुर: ग्यारह साल पहले मारपीट के एक मामले में पूर्व मंत्री रमई राम एवं उनके दो तत्कालीन बॉडीगार्ड को दोषी मानते हुए एक साल की सजा सुनाई गई है। हालांकि, प्रोबेशन अाॅफ ऑफेंडर्स एक्ट (परिवीक्षा अधिनियम) की धारा का लाभ देते हुए पूर्व मंत्री सहित तीनों दोषियों को मुक्त कर दिया गया। 1 सितंबर 1995 को हुआ था परिवाद पत्र दाखिल...

- अवर न्यायाधीश सप्तम रजनी कुमारी के कोर्ट में मिली सजा के बाद पूर्व मंत्री ने कहा कि यह नो एवीडेंस का मामला है। वह अपील करेंगे।
- मुशहरी थाना क्षेत्र के राम नारायण कुमार साह ने इस कोर्ट में 1 सितंबर 1995 को परिवाद पत्र दाखिल किया था।
- राम नारायण के अनुसार, 29 अगस्त 1995 को मुशहरी में एक स्कूल का शिलान्यास करते समय लोक धन के दुरुपयोग होने की उसने शिकायत की थी।
- इससे नाराज होकर पूर्व मंत्री रमई राम बुदबुदाय व गाली दे दी।
उन्होंने दोनों बॉडीगार्ड से मुझे मारने का आदेश दिया। बचाने गये रामचंद्र को बॉडीगार्ड ने मारा। फिर, दोनों को गाड़ी में बैठाकर सर्किट हाउस में ले जाकर कमरे में बंद कर पीटा। कोर्ट ने परिवादी एवं उनके गवाहों के बयान के आधार पर प्रथम दृष्टया आरोप को सही पाते हुए आईपीसी की धारा 323, 504 तथा 114 के तहत तत्कालीन मंत्री रमई राम तथा उनके दो अंगरक्षक कौशल किशोर यादव व मो. असलम के खिलाफ 4 अगस्त 2001 को सम्मन जारी किया था। सभी आरोपियों ने 14 अक्टूबर 2003 को कोर्ट में सरेंडर कर जमानत ले ली थी। इस कांड में शुक्रवार को कोर्ट ने तीनों अभियुक्तों को दोषी पाकर एक साल की सजा दी। परन्तु पूर्व में आपराधिक इतिहास न होने से प्रोबेशन अॉफ ऑफेंडर्स एक्ट का लाभ देते हुए तीनों अभियुक्तों को मुक्त कर दिया।
Source: Bhaskar
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