नई दिल्ली/पटना: जदयू के राज्यसभा सदस्य अनिल सहनी कतई मानने को तैयार नहीं हैं कि उन्होंने हवाई सफर के नाम पर घोटाला किया है। पार्टी की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में उन्होंने कहा है-हम घोटाले के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। मेरे खिलाफ कार्रवाई करने के बदले पार्टी इस लड़ाई में साथ दे।
बैंकों का नौ हजार करोड़ रुपए दबा कर सांसद विजय माल्या मौज कर रहे हैं। हम पर कार्रवाई की बात की जा रही है। इधर संकेत यह है कि जदयू उनके प्रति नरमी बरतने नहीं जा रहा है। उन्हें इस्तीफा देने के लिए कह दिया गया है। न देने पर जदयू विचार कर रहा है कि दूसरे रास्ते से उनकी सदस्यता कैसे खत्म की जा सकती है।
जदयू संसदीय दल के नेता शरद यादव की ओर से सहनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। एक सप्ताह की मियाद के पहले ही उन्होंने जवाब दे दिया। लेकिन, जवाब में उतनी ही बातें हैं, जो सहनी मीडिया के सामने बोलते रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि जवाब के मजमून से नेतृत्व संतुष्ट नहीं है।
लिहाजा उन्हें फिर से राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफे के लिए कहा जा सकता है। अगर ऐसा नहीं होता है तो पार्टी सहनी की बर्खास्तगी के रास्ते की तलाश करेगा। अगर वे मर्जी से इस्तीफा देते हैं तो अदालत से बरी होने के बाद भरपाई की जा सकती है।
दाग अच्छे नहीं लगते
-1991 में जैन हवाला कांड में नाम आने के बाद शरद यादव ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
-2005 में सीएम के तौर पर नीतीश ने कैबिनेट के साथ शपथ ग्रहण किया। दो घंटे बाद उन्हें जानकारी मिली कि मंत्रिपरिषद में शामिल जीतनराम मांझी चार्जशीटेड हैं। आधे घंटे के अंदर उनका इस्तीफा ले लिया गया। वही जीतनराम मांझी बाद में नीतीश के उत्तराधिकारी बने। नीतीश ने ही उन्हें पसंद किया।
-मंत्री रामनंदन सिंह को भी चार्जशीटेड होने के चलते इस्तीफा देना पड़ा। पिछले चुनाव के दौरान स्टिंग आपरेशन में फंसे तत्कालीन मंत्री अवधेश कुशवाहा को चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया गया।
-2005 में सीएम के तौर पर नीतीश ने कैबिनेट के साथ शपथ ग्रहण किया। दो घंटे बाद उन्हें जानकारी मिली कि मंत्रिपरिषद में शामिल जीतनराम मांझी चार्जशीटेड हैं। आधे घंटे के अंदर उनका इस्तीफा ले लिया गया। वही जीतनराम मांझी बाद में नीतीश के उत्तराधिकारी बने। नीतीश ने ही उन्हें पसंद किया।
-मंत्री रामनंदन सिंह को भी चार्जशीटेड होने के चलते इस्तीफा देना पड़ा। पिछले चुनाव के दौरान स्टिंग आपरेशन में फंसे तत्कालीन मंत्री अवधेश कुशवाहा को चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया गया।
क्या दिया जवाब
एयर टिकट का धन मेरे खाते में नहीं आया। इस घोटाले को मैंने ही उजागर किया। विजय माल्या को छूट, मुझ पर कार्रवाई क्यों।
दलील: जिस समय सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की, बिहार में विधानसभा का चुनाव चल रहा था। मैं स्टार प्रचारक था। भाजपा ने जदयू की संभावना को कम करने के लिए सीबीआई का सहारा लिया।
दलील: जिस समय सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की, बिहार में विधानसभा का चुनाव चल रहा था। मैं स्टार प्रचारक था। भाजपा ने जदयू की संभावना को कम करने के लिए सीबीआई का सहारा लिया।
अब नजर इथिक्स कमेटी की 25 मई की बैठक पर
जदयू की नजर 25 मई को होने वाली राज्यसभा की इथिक्स कमेटी की बैठक की सिफारिश पर भी है। उम्मीद है कि कमेटी सहनी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है। उस दिन माल्या का मामला भी आ सकता है।
पहले भी गई है सदस्यता
पहली बार 2005 में इथिक्स कमेटी की सिफारिश पर 11 सांसदों की सदस्यता समाप्त की गई। उन पर सवाल पूछने के बदले धन लेने का आरोप था। यह स्टिंग में उजागर हुआ था। सहनी पर एफआईआर और चार्जशीट भी है। उस मामले में कोई प्राथमिकी भी नहीं हुई थी। 11 में एक राज्यसभा, बाकी लोकसभा के थे।
Source: Bhaskar

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