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| शरद का चौथी बार जदयू अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने से इंकार |
पटना: शरद यादव अब जदयू की कमान नहीं संभालेंगे। सोमवार को उन्होंने चौथी बार पार्टी का अध्यक्ष बनने से इंकार कर दिया। शरद ने अपने फैसले से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत अन्य नेताओं को भी अवगत करा दिया है।
जदयू के संविधान के हिसाब से कोई व्यक्ति दो बार ही अध्यक्ष रह सकता है। लिहाजा शरद को फिर से अध्यक्ष बनाने के लिए जदयू के संविधान में संशोधन कराना पड़ता। ऐसा करने से उनके इंकार के बाद 10 अप्रैल को दिल्ली में राष्ट्रीय परिषद की बैठक में नए अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। जो राष्ट्रीय लोकदल और झारखंड विकास मोर्चा के साथ विलय की प्रक्रिया को आखिरी रूप देगा।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव के. सी. त्यागी ने कहा कि शरद यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अपने तीन कार्यकाल पूरे कर चुके हैं। उन्होंने संविधान में संशोधन करा पुनः अध्यक्ष बनने में अपनी असमर्थता जाहिर की है। उनको तीसरी बार अध्यक्ष बनाने के लिए सर्वसम्मति से जदयू के संविधान में संशोधन किया गया था। नई परिस्थितियों राष्ट्रीय परिषद में विचार किया जाएगा। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार में हिस्सा लेंगे।
सूत्रों के अनुसार शरद जदयू के अध्यक्ष बनने के इच्छुक नहीं हैं लेकिन वे विलय के बाद जन विकास पार्टी या जन विकास मोर्चा के नाम से बनने वाली नई पार्टी के अध्यक्ष के अभी से प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं। उनके अलावा रालोद के अजित सिंह का भी दावा मजबूत है। अगर शरद नई पार्टी के अध्यक्ष नहीं बने तो अजीत अध्यक्ष बनेंगे, अन्यथा उनको संसदीय बोर्ड की जिम्मेदारी दी जा सकती है। बाबू लाल मरांडी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और त्यागी को प्रधान महासचिव की जिम्मेदारी दिए जाने पर लगभग सहमति है।
Source: Bhaskar

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