भागलपुर: महाराष्ट्र के लातूर के हालात से सावधान होने की जरूरत है। लातूर में आलम यह है कि जलस्रोत के पास धारा 144 लगानी पड़ी। नगर निगम की तरफ से एक परिवार को 10 दिनों के लिए 200 लीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। बिहार के भागलपुर जिले में भी लातूर जैसा जल संकट है। पानी को लेकर मारामारी मची है। लोग नदी-पोखर का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। नाले जैसी दिखती है गंगा नदी...
भागलपुर के बीच से गंगा नदी गुजरती है पर अब यह नाले की शक्ल लेती जा रही है।सुल्तानगंज, नाथनगर, कहलगांव आदि क्षेत्र के ग्रामीण नदी पर आश्रित हैं। ठेला, रिक्शा व अन्य वाहनों से ग्रामीण गंगा नदी से पानी ढोने को विवश हैं। जगदीशपुर क्षेत्र की स्थिति तो भयावह है। नदियां सूख गई हैं। प्यास से बिलबिला रहे लोग बालू में गड्ढा कर पानी निकाल रहे हैं। पीने के लिए भी यही पानी उपयोग में लाया जा रहा है।
गंदा पानी पीने की बेबसी
जगदीशपुर के 90 प्रतिशत जलस्रोत सूख गए हैं। यहां एक जलमीनार है, जिसे चांदपुर स्थित बोरिंग से पानी मिलता है। यह चांदन नदी में स्थित है। मगर अब इस नदी में पानी नहीं है। चापाकल, कुएं, तालाब, बोरिंग पहले ही दम तोड़ चुके हैं। लोग कोकरा नदी में गड्ढे खोदकर पानी निकाल रहे हैं। उसी पानी को पीना तथा उसी गंदे पानी से स्नान, खाना बनाने सहित अन्य दैनिक कार्य यहां के लोगों की विवशता है। 52 बीघे का पोखर सूख चुका है।
मौसम की मार से सूखा तालाब, बना स्टेडियम
मुजफ्फरपुर के कुढ़नी प्रखंड के मधौल गांव में पिछले छठ में जिस तालाब में अर्घ्यदान किया गया था, उसकी तलहटी सामने है। जहां गांववाले अपने मवेशियों की प्यास बुझाने आते थे, आज उस तालाब के मैदान में क्रिकेट का शौक पूरा कर रहे हैं। आसपास के गांवों की टीम ने टूर्नामेंट शुरू कर दिया है। नाम दिया है ग्रामीण प्रीमियर लीग। इंडियन प्रीमियर लीग की ही तरह।
Source: Bhaskar

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