पटना: राज्य के विश्वविद्यालय या कॉलेजों में शैक्षणिक माहौल बेहतर नहीं है। शिक्षकों का शिक्षा के प्रति जवाबदेही का भाव दिखता है। उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों के माता-पिता में भी शिक्षा की भूख का अभाव दिखता है। इसका असर यह है कि राज्य के विश्वविद्यालय ऑर्गेनाइज्ड रूप से सर्टिफिकेट बेचने वाले संस्थान बनकर रह गए है। कुलपतियों से किया सवाल...
- राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद (रूसा) की बैठक में शिक्षामंत्री अशोक चौधरी ने विश्वविद्यालयों की स्थिति पर यह तल्ख टिप्पणी की।
उन्होंने बैठक में मौजूद कुलपतियों से सवाल किया कि कॉलेजों में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है या सर्टिफिकेट बेच रहे हैं।
व्यापक सुधार की है जरूरत
- शिक्षामंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है।
- अभी स्थिति यह है कि बच्चों का पहली कक्षा में एडमिशन हो जाता है।
- नकल कर मैट्रिक पास कर जाते हैं। इंटर में शिक्षक मिलते नहीं हैं। किसी प्रकार उसे भी निकाल लेते हैं।
- फिर छात्र पटना विश्वविद्यालय में स्नातक में नाम लिखा लेते हैं और मखनिया कुआं में कोचिंग करने लगते हैं।
- इसी प्रकार की स्थिति अन्य विश्वविद्यालयों में है। ऐसे बच्चों को हम पढ़ा कहां रहे हैं, उन्हें तो सिर्फ सर्टिफिकेट बेच रहे हैं।
- हमें बच्चों और उनके अभिभावकों में शिक्षा की भूख जगानी होगी। तभी उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले बिहार के बच्चों की जो 13 प्रतिशत आबादी है, उसे बढ़ाया जा सकेगा।
Source: Bhaskar

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