पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में अपराधियों को सजा दिलाने की धीमी पड़ती रफ्तार पर चिंता जताई है। शनिवार को अधिवेशन भवन में स्पीडी ट्रायल, स्पीडी अपील, जमानत रद्द और रिहाई विषय पर आयोजित कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधियों को सजा दिलाने का ग्राफ नीचे आया है।क्या कहा सीएम ने...
- वर्ष 2006 में जो माहौल बना था, वह आज नहीं है। डीजीपी साहब! ध्यान दीजिए।
- अगर पुलिस मुख्यालय की ओर से सुस्ती नहीं होती तो कम से कम आर्म्स एक्ट के मामले में तो सजा दिलाने की रफ्तार नहीं घटती।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2006 में 1609 अभियुक्तों को आर्म्स एक्ट में सजा हुई थी लेकिन वर्ष 2015 में यह संख्या घट कर 281 हो गई।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2006 में 1609 अभियुक्तों को आर्म्स एक्ट में सजा हुई थी लेकिन वर्ष 2015 में यह संख्या घट कर 281 हो गई।
- इसका मतलब है कि गवाह समय पर हाजिर नहीं हो रहे हैं। क्यों ना वर्ष 2006 वाला प्रयोग फिर से किया जाए?
- उस समय अपराधियों को सजा मिलने से एक अच्छा वातावरण बना था और लोग सामने आने लगे।
- अगर पुलिस महानिदेशक और अपर पुलिस महानिदेशक मुख्यालय प्रतिदिन जिलों के पुलिस अधीक्षक से बात नहीं करेंगे तो कार्रवाई में तेजी नहीं आएगी।
कहते हैं मोबाइल ट्रैक कर रहे, मोबाइल नहीं था तब कैसे पकड़ाते थे अपराधी?
- मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस अधिकारी मोबाइल ट्रैकिंग पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।
- जब भी पूछिए तो कहेंगे कि मोबाइल ट्रैक करा रहे हैं।
- जब मोबाइल नहीं था या ट्रैकिंग सिस्टम नहीं था, तब कैसे पकड़ते थे अपराधी।
- अपनी बुद्धि लगाना जरूरी है। परंपरागत ढंग से देखिए। मोबाइल ट्रैकिंग तो अतिरिक्त सहायता है।
- रोज नई टेक्नोलॉजी आ रही है। आपको हमेशा अपने आपको अपडेट करना होगा, नई तकनीक अपनानी होगी।
खुद फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाएगी सरकार
- मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बड़ी संख्या में फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने के लिए तैयार है।
- पहले इसमें केन्द्र सरकार का सहयोग मिलता था। अब राज्य सरकार इसे खुद खोलेगी।
- केस निपटारे में तेजी लाने के लिए सरकार जो भी कर सकती है करेगी।
- साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन और फॉरेंसिक जांच पर भी सरकार द्वारा पूरा ध्यान दिया जा रहा है।
सजा के बाद भी जमानत लेकर घूम रहे बदमाश
- मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत से लोगों को सजा मिल जाती है लेकिन वे बेल लेकर आराम से घूमते रहते हैं।
- ऐसे मामलों को देखना पड़ेगा। अगर अपराधी बेल पर आकर फिर से अपराध कर रहा है तो लोक अभियोजकों उसकी जमानत रद्द कराएं।
- तभी अपराधियों को अहसास होगा कि गलत करेंगे तो पकड़े जाएंगे और सजा मिलेगी।
डीजीपी रोज सभी एसपी से बात करें
- डीजीपी प्रतिदिन जिलो के एसपी से बात कर कार्रवाई की जानकारी लें, इससे मुकदमों के निपटारे में तेजी आएगी।
- कानून का राज तभी कायम होगा। जब सब लोग मिल कर काम करेंगे। चार्जशीट समय पर दायर की जाए।
- लोक अभियोजक यह देखें कि ट्रायल में देरी क्यों हो रही है? ज्यादा तारीख क्यों पड़ रही है?
- मानवाधिकार, अपराध पर नियंत्रण और विधि व्यवस्था की मुख्यालय स्तर से सख्त मॉनिटरिंग होनी चाहिए।
- कार्यक्रम में मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह और पुलिस महानिदेशक पी.के. ठाकुर ने भी विचार व्यक्त किए।
- गृह विभाग के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी ने स्वागतभाषण और पटना प्रमंडल के आयुक्त आनंद किशोर ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
Source: Bhaskar

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