पटना: पटना हाईकोर्ट ने शराबबंदी के मामले में राज्य सरकार के रवैये पर तल्ख टिप्पणी की है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश इकबाल अहमद अंसारी और न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह की खंडपीठ ने बुधवार को प्रधान अपर महाधिवक्ता ललित किशोर से कहा-सरकार एयरपोर्ट पर हवाई यात्रियों की सांस की जांच कराकर जानना चाहती है कि उन्होंने शराब का सेवन किया है या नहीं। ये क्या है? सरकार क्या यह दिखाना चाहती है कि कोई व्यक्ति बाहर शराब का सेवन कर के बिहार में प्रवेश नहीं करे? शराबबंदी लागू करने में सरकार ऐसी स्टंटबाजी बंद करे।
दरअसल, याचिकाकर्ता के वकील हर्ष सिंह एवं जितेंद्र सिंह ने कोर्ट को बताया था कि मीडिया में ऐसी खबरें आई हैं। पुलिस, हवाई अड्डे के बाहर हरेक हवाई यात्री की ब्रेथ एनेलाइजर से जांच करेगी। देखेगी कि उन्होंने शराब का सेवन किया है या नहीं? सरकार की ओर से प्रधान अपर महाधिवक्ता ने कहा कि 5 अप्रैल से पूर्ण शराबबंदी के लिए सरकार कृतसंकल्पित है। उसे ऐसा करने का जनमत भी मिला है। इस पर न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह ने प्रधान अपर महाधिवक्ता से पूछा-क्या इससे पहले बिहार सरकार शराब बेचने के लिए स्कूल और मंदिरों के समीप अंग्रेजी शराब की दुकानों को खोलने के लिए कृतसंकल्पित थी? न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह ने एक और तल्ख टिप्पणी की-सरकार आज हमें मर्सीडीज गाड़ी खरीदवाए और अगले दिन पर्यावरण प्रदूषण के तर्क पर सभी चारपहिए वाहनों के चलने पर प्रतिबंध लगा दे,
तो लोग गाड़ियों का क्या करेंगे?
न्यायाधीश की यह टिप्पणी तब आई, जब याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि 2 अप्रैल को विदेशी शराब की बिक्री के लाइसेंस का नवीनीकरण खुद सरकार करती है और 5 अप्रैल को इसकी बिक्री और सेवन को रोक देती है। करोड़ों की शराब लेकर आपूर्तिकर्ता अब जाए तो कहां जाए? याचिकाकर्ता के वकील जितेंद्र सिंह ने बताया कि 5 अप्रैल को सरकारी अधिसूचना जारी भी नहीं हुई थी कि उसी दिन दोपहर में बीयर ले जा रहे एक युवक को पुलिस ने थाने में बंद कर दिया। यह सरकारी मशीनरी की तानाशाही है। इस पर कोर्ट ने सरकार को स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
Source: Bhaskar

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