Articles by "nitish kumar"

पटना : सुकमा नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों का पार्थिव शरीर ले जाने वाले ट्रक को रोके जाने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना हो रही है. दरअसल, इंटरनेट पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें सुकमा नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों का पार्थिव शरीर ले जा रहे वाहन को कथित रूप से इसलिए रोक कर रखा गया क्योंकि वहां से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का काफिला गुजरने वाला था. सीएम का काफिला गुजरने के बाद पार्थिव शरीर ले जा रहे ट्रक को जाने की अनुमति दी गई. यह घटना मंगलवार की है. 
इंटरनेट पर इस वीडियो के वायरल होने पर भाजपा नेता सुशील मोदी ने इसकी आलोचना की है.  
  एयरपोर्ट नहीं पहुंचा कोई नेता
नीतीश कुमार पर विपक्ष के नेताओं ने शहीदों के पार्थिव शरीर के आने पर एयरपोर्ट पर किसी कैबिनेट मंत्री के न रहने का भी आरोप लगाया है.


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Sushil Kumar Modi 
✔@SushilModi
Nitish was enjoying movie instead of going to airport to pay his respect to Sukma martyrs.Neither his Min went toairport

मंगलवार शाम सुकमा नक्सल हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों का पार्थिव शरीर एयरपोर्ट से लाया जा रहा था. उसी वक्त एयरपोर्ट के पास से नीतीश कुमार एक कार्यक्रम से होकर गुजर रहे थे. हमेशा की तरह रास्ते में सीएम के काफिले में कोई व्यवधान न पड़े इसलिए शहीदों के पार्थिव शरीर को ले जा रहे ट्रक को बीच रास्ते में रोक दिया गया. 
source zee news

मुंबई : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के सुप्रीमो राज ठाकरे पर यह कहते हुए तंज कसा कि बिहार के लोग किसी पर बोझ नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था कि मुंबई में बिहार स्थापना दिवस समारोह का विरोध किया जाता था. नीतीश ने हालांकि, राज ठाकरे का नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा स्पष्ट रूप से मनसे प्रमुख की तरफ था. मैथिली समन्वय समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहारियों ने देश में हर जगह अपने ज्ञान और क्षमताओं से नाम कमाया.
'बिहार स्थापना दिवस का विरोध करने वाले शांत हो गए'
कुमार ने कहा, ‘देशभर के लोग बिना बिहारियों के कोई काम नहीं करा सकते. वे (बिहारी) किसी पर निर्भर नहीं हैं और न ही वे किसी पर बोझ हैं.’उन्होंने राज ठाकरे का नाम लिए बिना कहा, ‘कुछ लोगों ने यहां बिहार स्थापना दिवस का विरोध किया. अब वे शांत पड़ गए हैं.’कुमार 2012 में शहर में 100वें बिहार स्थापना दिवस समारोह मनाने के लिए मुंबई में बिहारियों के खिलाफ ठाकरे द्वारा चलाए गए अभियान का उल्लेख कर रहे थे. कुमार ने तब कहा था कि उन्हें मुंबई में आने के लिए वीजा की आवश्यकता नहीं है.
हम किसी की नकल नहीं करते-नीतीश
मनसे की राजनैतिक ताकत अब काफी घट गई है. 2009 में महाराष्ट्र विधानसभा में मनसे के सीटों की संख्या 13 थी. पार्टी का अब सिर्फ एक विधायक है जबकि मुंबई नगर निगम में उसके सीटों की संख्या 28 से घटकर सात रह गई है.बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अपनी उपलब्धियों का प्रचार करने की आवश्यकता नहीं महसूस करते. उनके राज्य में बदलाव खुद महसूस किया जा रहा है.
उन्होंने कहा, ‘हम किसी की नकल नहीं करते. हमारे विकास के काम को देखा जा रहा है.’समाज में आखिरी व्यक्ति तक विकास पहुंचे इस बात को सुनिश्चित करने के लिए सभी क्षेत्रों के विकास की आवश्यकता है.’

मोतिहारी : महात्मा गांधी के ‘चंपारण सत्याग्रह’ के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को पूर्वी चंपारण जिले के चंद्रहिया से मोतिहारी तक करीब सात किलोमीटर की पदयात्रा की. चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के तहत आयोजित इस पदयात्रा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, शिक्षा मंत्री अशोक कुमार चौधरी के अलावा और भी कई मंत्री और नेता शामिल हुए.
मुख्यमंत्री ने चंद्रहिया से मोतिहारी तक की यात्रा सुबह आठ बजे शुरू की. इससे पूर्व उन्होंने गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और शिलापट्ट का लोकार्पण किया. कार्यक्रम स्थल पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया.मुख्यमंत्री के साथ सभी लोगों ने पदयात्रा शुरू करने से पहले प्रार्थना सभा में भाग लिया. मुख्यमंत्री ने यहां चंपा के पौधे लगाए. इस मौके पर नीतीश कुमार ने कहा कि गांधी जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए वह यह पदयात्रा कर रहे हैं. पदयात्रा में बड़ी संख्या में कई लोग शामिल हुए. इस दौरान चंद्रहिया से लेकर मोतिहारी तक सड़क पर आवागमन रोक दिया गया और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे.
महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया
पदयात्रा के समापन पर मोतिहारी के गांधी मैदान में नीतीश ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और यहां भी सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया. उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी ने चंपारण में अंग्रेज शासकों द्वारा नील की खेती के लिए किसानों को बाध्य करने के खिलाफ 10 अप्रैल, 1917 को सत्याग्रह की शुरुआत की थी. इसके सौ वर्ष पूरे होने पर बिहार में बीते सप्ताह से समारोहों की शुरुआत हुई.
source zee news

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